मेरे भौतिक शरीर को लोग भारत नाम से जानते है
मै दुनिया में मुसाफिर हु
हर दिन को कुछ इस तरह जीता हु जेसे कोई आखरी हो क्योकि इस जिन्दगी का सत्य मृत्यु है चाहे वो आज हो या कल होनी जरुरी है
मै इश्वरकी शक्ति मै विश्वास नही करता
मै अखंड भारत का नागरिक न तो हिन्दुओ के ज्यादा पक्ष मै हु न ही मुस्लमान के मै तो मानव धर्म मै विश्वास करता हु
दोस्त बनाने का शौक है पर मै दोस्ती हरेक से नही करता
"मुसाफिर है हम भी मुसाफिर हो तुम भी कही किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी "
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