Monday, September 24, 2012

मुझे परवाह हैं
हर दिन,
मेरे अपनों की !
पर वे कहा
समझे कदर ,
मेरे सपनो की !
फिर भी
सफ़र चलता रहा
रास्ते बढ़ते रहे ,
ना हयात बदली,
न सोच !
बस  इशारे
मिलते रहे
रुख मुड़ता गया !
वक्त की तेजी ने
सफ़र को रोका
मेने उस सुबह
किनारे को देखा,
जिस पर खड़ी
कश्ती का
मुश्फि मै था
पर, वो रास्ते
वो सफ़र ,
वो इशारे ,
वो मंजिल
थी
मेरे अपनों की !
मेने भी
सफ़र में
दुरिया देखी  थी
सागरों की !
कम्बक्त  मंजिले
मिल ही जायेगी
मुझे ,
मेरे सपनों की !!!!! 


-----भारत-----

Sunday, September 2, 2012

-----खालीपन-----

उसके जिक्र पे "भारत" बात तो किया कर  !
सलाम के बदले कभी सलाम तो दिया कर  !!

जिंदगी के पलो को कुछ तु भी जिया कर  !
पूरी ना पी सके तो थोडी थोडी पिया कर  !!

इश्क  ना सही मगर दोस्ती तो किया कर  !
मुलाकात ना कर सके तो बात ही किया कर  !!

शुरुआत करे कोई तो साथ भी दिया कर  !
दूसरो को छोड के खुद को भी समझा कर  !!

बिछडें हुए यारो को कभी कभी तो मिला कर  !
दोस्ती के उन हिस्सों की तारीफे भी किया कर  !!

है अगर दुश्मनी तो दोस्ती से जाया कर  !
दिल मे छुपे दर्द को लफ्जो मे तो लाया कर  !!

चली गयी वो रात अब दिन मे तो जगा कर  !
चार दिन की जिंदगी को जिंदगी से जिया कर  !!

             -----भारत-----

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