मुझे परवाह हैं
हर दिन,
मेरे अपनों की !
पर वे कहा
समझे कदर ,
मेरे सपनो की !
फिर भी
सफ़र चलता रहा
रास्ते बढ़ते रहे ,
ना हयात बदली,
न सोच !
बस इशारे
मिलते रहे
रुख मुड़ता गया !
वक्त की तेजी ने
सफ़र को रोका
मेने उस सुबह
किनारे को देखा,
जिस पर खड़ी
कश्ती का
मुश्फि मै था
पर, वो रास्ते
वो सफ़र ,
वो इशारे ,
वो मंजिल
थी
मेरे अपनों की !
मेने भी
सफ़र में
दुरिया देखी थी
सागरों की !
कम्बक्त मंजिले
मिल ही जायेगी
मुझे ,
मेरे सपनों की !!!!!
-----भारत-----
हर दिन,
मेरे अपनों की !
पर वे कहा
समझे कदर ,
मेरे सपनो की !
फिर भी
सफ़र चलता रहा
रास्ते बढ़ते रहे ,
ना हयात बदली,
न सोच !
बस इशारे
मिलते रहे
रुख मुड़ता गया !
वक्त की तेजी ने
सफ़र को रोका
मेने उस सुबह
किनारे को देखा,
जिस पर खड़ी
कश्ती का
मुश्फि मै था
पर, वो रास्ते
वो सफ़र ,
वो इशारे ,
वो मंजिल
थी
मेरे अपनों की !
मेने भी
सफ़र में
दुरिया देखी थी
सागरों की !
कम्बक्त मंजिले
मिल ही जायेगी
मुझे ,
मेरे सपनों की !!!!!
-----भारत-----