Tuesday, October 23, 2012

{हालात कुछ अजीब लिखता हूँ मेरे ना सही पर मेरे यार के लिखता हूँ }

उन दिनों के
किस्से ,
कुछ लगते है
बागान के हिस्से
की तरह !
तेरा मिलना हुआ
मुक्कमल ,
सावन के
बोछारो की तरह !
तुम आती हो
मेरे ख्यालो में अब
फूलो के "खुश्बू" कि तरह !
बढती गयी
अपनी मोहब्बत ,
घास के
चादर की तरह !
मिलते गए
मुझे सपने ,
डाल डाल पर
कलियों की तरह !
उन सर्दी की
रातो में
छतो से गुफ्तगू
करते चेहरे
दिखते थे
हसते हुए
फूलो की तरह !
मेरा हर लम्हा
वो इरादा,
वो ख्याल,
वो चाहत ,
वे वादे
सब है तुझको
पाने की फ़िराक में
मगर ये दुनिया दिखती है
कुछ काँटों की तरह !
तुझसे बिछड़ना
मोहब्बत के
जख्मो को
भरना,
भरे घावो  का
तश्वीर में बदलना
फिर तो
उस तश्वीर व दिल
के हालात
कुछ हवाओं से
बन गए ,
जो सर पटकती
है अब भी
सूखे पतों पर
पतझड़ में फेले
मातम की तरह !

-----भारत------



एक शेर में पूरे हालात  :--

मेरी अनमोल कश्ती को मोहब्बत ऐसे साहिल से हुई _भारत!
जिसको मुश्फि तो चाहता मगर मुसाफिर नही चाहते !!!!!!!!


-----भारत------

 

Saturday, October 13, 2012

मुख़्तसर नफरत थी जिससे मुझको !
कलाम-ए-मोहब्बत भी उसी पे निकले !!

हर मुलाक़ात पर वो रज्म-ए-लब्ज !
गुफ्तगू कें बहाने भी उसी के निकले !!

दिखता था हुस्न, बुर्खे  की दीवार से !
मगर बाजारों में चेहरे भी उसी के निकले !!

ख़ाक हुआ नशा -ए- इश्क  उसके ही इरादों से !
वे सुरत के शौकीन होकर सीरत की राह पे निकले !!

-----भारत-----
उस शख्स को मोहब्बत की क्या खबर !
जो मोहब्बत का मतलब ना जाना कभी !!

उस शख्स की मोहब्बत का कितना सफर !
जो मोहब्बत  के रंग में ना मिला कभी !!

उस शख्स की मोहब्बत पर क्या भरोसा !
जो मोहब्बत को मोहब्बत ना समझा कभी !!

उस शख्स पर मोहब्बत का क्या असर !
जो मोहब्बत के लिबास में ना दिखा कभी !!

-----भारत-----
ना कभी उससे
बात हुई ,
ना कभी मुलाकात
चन्द दिनों की
उन कक्षा में,
उसकी बचपने  भरी
हरकतों से
नफरत कब हुई पता भी नहीं चला !

नफरत भरी आग
से उसको
मिलने की कोशिश ,
फिर मिलना
बतियाना,
बिखरना,
और  उसकी हरकतों
को समझना ,
कम्बख्त  मोहब्बत कब हुई पता भी नही चला !

मोहब्बत के
 नशे में ,
खामोश रहने की
गलती ,
फिर शक भरे
लब्ज का चलना ,
और लब्जो का
तीर में बदलना
कम्बख्त फिर से नफरत कब हुई पता भी नही चला !!!!!!!!


-----भारत-----