{हालात कुछ अजीब लिखता हूँ मेरे ना सही पर मेरे यार के लिखता हूँ }
उन दिनों के
किस्से ,
कुछ लगते है
बागान के हिस्से
की तरह !
तेरा मिलना हुआ
मुक्कमल ,
सावन के
बोछारो की तरह !
तुम आती हो
मेरे ख्यालो में अब
फूलो के "खुश्बू" कि तरह !
बढती गयी
अपनी मोहब्बत ,
घास के
चादर की तरह !
मिलते गए
मुझे सपने ,
डाल डाल पर
कलियों की तरह !
उन सर्दी की
रातो में
छतो से गुफ्तगू
करते चेहरे
दिखते थे
हसते हुए
फूलो की तरह !
मेरा हर लम्हा
वो इरादा,
वो ख्याल,
वो चाहत ,
वे वादे
सब है तुझको
पाने की फ़िराक में
मगर ये दुनिया दिखती है
कुछ काँटों की तरह !
तुझसे बिछड़ना
मोहब्बत के
जख्मो को
भरना,
भरे घावो का
तश्वीर में बदलना
फिर तो
उस तश्वीर व दिल
के हालात
कुछ हवाओं से
बन गए ,
जो सर पटकती
है अब भी
सूखे पतों पर
पतझड़ में फेले
मातम की तरह !
-----भारत------
एक शेर में पूरे हालात :--
मेरी अनमोल कश्ती को मोहब्बत ऐसे साहिल से हुई _भारत!
जिसको मुश्फि तो चाहता मगर मुसाफिर नही चाहते !!!!!!!!
-----भारत------
उन दिनों के
किस्से ,
कुछ लगते है
बागान के हिस्से
की तरह !
तेरा मिलना हुआ
मुक्कमल ,
सावन के
बोछारो की तरह !
तुम आती हो
मेरे ख्यालो में अब
फूलो के "खुश्बू" कि तरह !
बढती गयी
अपनी मोहब्बत ,
घास के
चादर की तरह !
मिलते गए
मुझे सपने ,
डाल डाल पर
कलियों की तरह !
उन सर्दी की
रातो में
छतो से गुफ्तगू
करते चेहरे
दिखते थे
हसते हुए
फूलो की तरह !
मेरा हर लम्हा
वो इरादा,
वो ख्याल,
वो चाहत ,
वे वादे
सब है तुझको
पाने की फ़िराक में
मगर ये दुनिया दिखती है
कुछ काँटों की तरह !
तुझसे बिछड़ना
मोहब्बत के
जख्मो को
भरना,
भरे घावो का
तश्वीर में बदलना
फिर तो
उस तश्वीर व दिल
के हालात
कुछ हवाओं से
बन गए ,
जो सर पटकती
है अब भी
सूखे पतों पर
पतझड़ में फेले
मातम की तरह !
-----भारत------
एक शेर में पूरे हालात :--
मेरी अनमोल कश्ती को मोहब्बत ऐसे साहिल से हुई _भारत!
जिसको मुश्फि तो चाहता मगर मुसाफिर नही चाहते !!!!!!!!
-----भारत------