जब भी करता हुं तेरे दर पर सजदा !
मैं खुद को भुल जाता हुं तुझे याद करते करते !!
तुझे जब भी देखता हुं हर ख्वाब में !
मेरे अश्क बह जाते है तेरा नूर देखते देखते !!
जब भी ख्याल आता है तेरे हर हालात का !
मेरे अल्फाज खो जाते है तुझ पे नज्म लिखते लिखते !!
तुने हर जगह में फैलाया है परचम अपना !
मेरा रुख मुड जाता है तेरा गान सुनते सुनते !!
तुने सबकी चाहत मुकम्मल की उनकी दुआं में !
मेरी तो हर चाहत रुक जाती है तेरे दर पे आते आते !!
जबसे देखा है तेरे दर को "भारत" इस पे नजर !
बस जिंदगी छोडना चाहता हु इस पे यूही हंसते हंसते !!
-----भारत-----