Thursday, August 30, 2012

········मेरे हनुमान···········

जब भी करता हुं तेरे दर पर सजदा  !
मैं खुद को भुल जाता हुं तुझे याद करते करते  !!

तुझे जब भी देखता हुं हर ख्वाब में !
मेरे अश्क बह जाते है तेरा नूर देखते देखते !!

जब भी ख्याल आता है तेरे हर हालात का !
मेरे अल्फाज खो जाते है तुझ पे नज्म लिखते लिखते !!  

तुने हर जगह में फैलाया है परचम अपना !
मेरा रुख मुड जाता है तेरा गान सुनते सुनते  !!   

तुने सबकी चाहत मुकम्मल की उनकी दुआं में !
मेरी तो हर चाहत रुक जाती है तेरे दर पे आते आते  !!   

जबसे देखा है तेरे दर को "भारत" इस पे नजर !
बस जिंदगी छोडना चाहता हु इस पे यूही हंसते हंसते !!    

                  -----भारत-----       

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Monday, August 20, 2012

---ईद मुबारक---

            --ईद मुबारक--

अल्लाह जाने कहा छुपा मेरे ईद का चांद ♥
उसे देखते ही खबर ईद की आई होगी ♥♥

तेरी पाक सीरत को या तारीफी हुस्न को ♥
जिसने भी देखा ईदी उसको मिल गई होगी ♥♥

अमीर है तु , तुझे इस गरीब की ईद से क्या ?♥
फिर भी दिल ने दुआ तेरे लीए ही की होगी ♥♥

जिसने तुझको देखा है, ईद उसको ही मुबारक ♥
शायद कीसी ओर को तस्वीर नशीब हुई होगी♥♥         

      ♥♥♥ भारत ♥♥♥        

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Wednesday, August 1, 2012

"कुछ था मगर नही सा"

{हालात कुछ अजीब लिखता हु ....
मेरे ना सही ...
पर, मेरे यार के लिखता हु ......}




कोलेज का सफ़र
अजीब था..
वो पास थी ,
मगर ..
दूरी का एहसास लिए !!

खुदा की मेहरबानी
व वक्त के साथ ...
मुझको मिला
दोस्ती का हाथ ...
एक आस लिए ..
प्यार का एहसास लिए !!

सफ़र शुरू हुआ ,
इंतजार के साथ
कुछ राह मेने देखी
कुछ उसने भी ...
जगह जो मिली
जहा मिली
जैसी मिली ...
मगर थी
जन्नत सा एहसास लिए !!

उसकी मुलाकाते
मुलाकात से हुई
वो बाते ...
बातो में जुल्फों
का गिरना ...
गिरी जुल्फों का
हाथो से मिलना
मेरे हाथ का
उस हाथ को रोकना
उस हालात से
उसका  मुस्कुराना
कुछ था जरुर
मगर ...
नही सा एहसास लिए !!

वक्त से धोखा मिला
उसका मिलना
कुछ कम हुआ ....
वो मुस्कुराना
अब नम हुआ ...
सुबह के इंतजार
को अब
शाम मिली ....
मेरी ही बातो को
शेखी की
राह मिली ..
दिल में कुछ था
मगर ...
दिखावे सा एहसास लिए !!

मै उलझा
फकत
सोच खातिर
बेमतलब की
आस में ...
अनबुझी सी
पहेली में ..
बेकार सी
उलझन में ...
"ये ऐसी है या वेसी"
वक्त जाया हुआ
कुछ यादो
के साथ ....
कुछ उनके
साथ गयी
तो कुछ मेरे भी ..
इसे मोहब्बत
कहू या
आशिकाना शौक
दिल धडकता था
उस के खातिर ..
मगर ...
दर्द का एहसास लिए !!

वक्त गुजर चुका ,
फिर भी ..
दिल आवारा
है तो ....
कभी बेगाना
कमबख्त आवाज भी
वही देता है ..
उसी आशा में ...
वो कुछ तो थी
मगर ....
नही सा एहसास लिए  !!!!!


-----भारत-----


बुजुर्गो की हरकते , अब भी  हकीकत सी  है !
तुम नये हो , लेकिन बाते पुरानी सी है !!

नियमो के बोझ में , पुतले कुछ नये से है !
सड़के बन चुकी पर , रास्ते पुराने से है !!

हालात कुछ नये मगर साये  वही पुराने है !
होश में कैसे रहे ,जब दिल ही बेह्होशी में है !!

मोहब्बत कहा है , जब हर वादे नए से है !
दिलो की महफ़िल में अब, दीवाने अजीब से है !!


-----भारत ----- 
चेहरे जितने देखे ..
सबके सब 
खुबसूरत थे ...
मुलाकात के बाद 
कुछ दिल से 
बदसूरत निकले .....

अजीब दौर था ,
जब नूर देखना 
नाज समझते थे ...
आज नकाब क्या 
हटे ....
गुरुर से भरे,
चेहरे निकले ....

चेहरे का ...
आशिकाना शौक 
इश्क के नाम ,
समझोता है ...
"ये नही तो वो ही सही "
ये प्यार है या ,
कोई खिलौना है !!!!!!

-----भारत ------
अजीब रुख मौसम ने बदला है !
कल का पंछी आज उड़ने लगा है 
गेरो की उस महफिल में ...
दिल के उस कोने तक ...
हमारा भी कही नाम छुपा है !!

वो खुदा को खुद का समझता था !
पर, काफ़िर के दिल में भी , 
खुदा सा नूर दिखा है.....
तू भी मुझ सा लगता है  
मै भी तो दीखता हु तुझ सा ..
फर्क सिर्फ रहा इतना 
मुझे हिन्दू का घर तो ,,
तुझे मुस्लिम का मिला है !!!

इंसानी मोहब्बत तुने भी सीखी ...
प्यार का पैगाम मिला मुझको भी 
कुछ दर्द तुने सहा ...
कुछ जख्म मिले मुझको भी 
फर्क सिर्फ इतना रहा ....
खुदगर्ज ने खुद खातिर ,
तुझे मुजाहिर तो मुझे ..
काफ़िर का नाम दिया है !!!!!



-----भारत शोभावत कोटडी-----