Wednesday, August 1, 2012

चेहरे जितने देखे ..
सबके सब 
खुबसूरत थे ...
मुलाकात के बाद 
कुछ दिल से 
बदसूरत निकले .....

अजीब दौर था ,
जब नूर देखना 
नाज समझते थे ...
आज नकाब क्या 
हटे ....
गुरुर से भरे,
चेहरे निकले ....

चेहरे का ...
आशिकाना शौक 
इश्क के नाम ,
समझोता है ...
"ये नही तो वो ही सही "
ये प्यार है या ,
कोई खिलौना है !!!!!!

-----भारत ------

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