Friday, April 25, 2014

खूबियाँ महफूज रखता है आशिक तेरी,
कुछ गुनाह भी तो कर दुश्मनो के लिए...

महकती है हर जगह में सुगन्ध तेरी,
कभी नजर भी तो आ हकीकत के लिए...

पुकारती है मस्जिद से वो आवाम तेरी,
कभी मन्दिर भी तो आ अपनो के लिए...

तेरे खातिर रखती है रोजां अम्मा तेरी,
कभी मिल भी तो आ उसे खुदा के लिए...

मौसम की तरह बदलती है "अजीब" अदाएं तेरी,
कभी मुड़कर भी तो देख, दोस्तो के लिए...           

-- 'भारत "अजीब" -- 

जिन्दगी की दौड़ मे...

जिन्दगी की दौड़ में जमाना डूब रहा हैं
भाग रहा हैं मुसाफ़िर शायद सूरज डूब रहा हैं

सियासत की दौड़ में अब वतन डूब रहा हैं
तू हिन्दू मैं मुसलमान कहकर इंसान डूब रहा हैं

चाहत की दौड़ में वो आशिक डूब रहा हैं
बात ना बनी तो अब मयखाने मे डूब रहा हैं

खयालो की दौड़ मे हर शख्स डूब रहा हैं
कुछ कर लो भाई नही तो वक्त डूब रहा हैं           

-- 'भारत "अजीब" --