जिन्दगी की दौड़ में जमाना डूब रहा हैं
भाग रहा हैं मुसाफ़िर शायद सूरज डूब रहा हैं
सियासत की दौड़ में अब वतन डूब रहा हैं
तू हिन्दू मैं मुसलमान कहकर इंसान डूब रहा हैं
चाहत की दौड़ में वो आशिक डूब रहा हैं
बात ना बनी तो अब मयखाने मे डूब रहा हैं
खयालो की दौड़ मे हर शख्स डूब रहा हैं
कुछ कर लो भाई नही तो वक्त डूब रहा हैं
-- 'भारत "अजीब" --
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