Saturday, January 26, 2013

बिजलियाँ गिरने लगी,लोग लाश होने लगे  !
तेरे संवरने के बाद, सब इल्जाम आने लगे !!  

पर्वत पत्थर पिघलने लगे, बादल बेवक्त रोने लगे !  
तेरे घर से निकलने पर, सबके चहरे बदलने लगे !! 

पंछी पंख भरने लगे ,फूल अब मुस्कुराने लगे !
तेरे मोहल्ले से गुजरने पर सब लोग चलने लगे !!

बाजार में हरकत होने लगी कई इशारे होने लगे !
तु रुकी दुकां पर तो लोग भी ग्राहक बनने लगे !! 

ग़ालिब दर्द छाने लगा अब याद फ़राज आने लगे !
तेरा अजनबी से मिलने पर हम तो शायर होने लगे !!            

♥..भारत..♥    

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