Thursday, December 18, 2014

····एक सफर····

{हालात कुछ अजीब लिखता हू मेरे ना सही पर मेरे यार के लिखता हू}

·····एक सफर······

शाम की सर्द हवाओ के कहर
के साथ,
आज मैं
सफर में था
खुद तोहफा बन,
तोहफा लीए . . .

कदम जमी पे थे
सामने अनजान से लोग,
सांसे थम सी गयी
उसके मिलने
का जो वक्त हुआ...

आज मेरा हाल
कुछ काले बादलो में
छिपे चांद की तरह था
मै बन्द कमरे मे
उसके
इन्तजार मे था
और
वो इस जश्न
के तोह्फे से
गाफिल,

सहेलियो की
अठखेलिया बढती गयी
कदम मेरी
ओर चलते गये,
आखिर कदम
रुक गये ,,
मेरे होने का
अहसास हुआ
ये ही तोहफा था
उसके जश्न पैदाईश का...

जैसे तितली फूलो को
देख मुस्कुराती हैं,
परीन्दे खुले
आसमान को देख,
और नदियां सागरो
से मिल
जो अनुभव महसूस करते है
कुछ वेसे ही सुकुन
का एहसास हो रहा था
उसकी झुकी नजरे
बार बार मुझसे
मिल इस्तकबाल
कर रही थी...

अब वक्त के साथ
दोनो की नजदिकिया
बढ रही थी
और माहौल मे गर्माहट
कुछ दोस्त
हंसी मजाक कर रहे थे
और हम
अपने अन्दाज मे
आखमिचोली

कुछ नजराने
उनको पेश हुए
कुछ तस्वीरो से
उनके तोहफे
की तैयारिया
फिर सर्द हवाओ
के साथ खुले मैदान में
झूले पे गूफ्तगु करना,
एक थी थाली में
निवाले लेना,
और हरी घास
की चादर पर
साथ साथ टहलना
नया सा था

यह जीस्त के शुरुआती
कदम थे
दो हयातो के ,
दोस्ती के साथ,
मोहब्बत के करीब,
रिश्तो मे तब्दील होने
वालो का सफर था
मेरे लिये
उसके लिये
मुस्कान के साथ,
कुछ नया सा था ,
अच्छा सा था...!!!!   

भारत_शोभावत_कोटड़ी_'अजीब' 
       १८-१२-२०१४  

तख्त पलटते ही अक्सर मौसम बदल जाते है..

तख्त पलटते ही अक्सर मौसम बदल जाते है..
हुस्न देखने वालो के रोज दिल बदल जाते हैं..! 

भरोसा रखने पर मिटती है, जमाने में तकलीफे..,
मगर नादान लोगो के अक्सर खुदा बदल जाते हैं..!

सुबह के दुआं-सलाम पर दिन बदल जाते हैं..
नए नए अमीरो के अक्सर ढंग बदल जाते हैं..!

रोज इधर-उधर की बात करते है गुफ्तगू में हम..,
मगर इश्क की बात पे उनके तेवर बदल जाते हैं..!        

भारत_शोभावत_कोटड़ी_'अजीब' 

Sunday, October 26, 2014

जीने की राह रोशन करे ...
वो इरादा महफूज रख ले तू !

होती है शाम सवेरो की ...
यह इल्म बस मे कर ले तू !

वो इरादा वे ख्वाइश फलक की हैं...
उन रास्तो को सजदे में रख ले तू !

मुक्क्मल होगी तेरी मंजील...
नेकी की राह पकड़ ले तू !

एक उम्र थी, तो इश्क था ...
अब खुदा से मोहब्बत कर ले तू !   

. . . भारत अजीब . . .

Sunday, October 5, 2014

ठिकाना बदलता हू हर दिल से, दिल मिलने से पहले...

ठिकाना बदलता हू हर दिल से, दिल मिलने से पहले...
सुना हैं मुझसे बिछड़ने के बाद, वो रोया बहुत हैं...!

काफी सोचा था मेने , उसको मिलने से पहले...
मगर उसे देखते ही लब्ज आंखो से निकले बहुत हैं...!

संभाल के रखा था उसने, बकरा ईद से पहले...
मगर हलाल करते हुए वो शख्स रोया बहुत हैं...!      

बुढे चिरागों से दुआं , उसने बटोरी थी पहले...
सुना है उसके आंगन मे आज रोशनी बहुत हैं...!

भारत_शोभावत_कोटड़ी_'अजीब'

Friday, April 25, 2014

खूबियाँ महफूज रखता है आशिक तेरी,
कुछ गुनाह भी तो कर दुश्मनो के लिए...

महकती है हर जगह में सुगन्ध तेरी,
कभी नजर भी तो आ हकीकत के लिए...

पुकारती है मस्जिद से वो आवाम तेरी,
कभी मन्दिर भी तो आ अपनो के लिए...

तेरे खातिर रखती है रोजां अम्मा तेरी,
कभी मिल भी तो आ उसे खुदा के लिए...

मौसम की तरह बदलती है "अजीब" अदाएं तेरी,
कभी मुड़कर भी तो देख, दोस्तो के लिए...           

-- 'भारत "अजीब" -- 

जिन्दगी की दौड़ मे...

जिन्दगी की दौड़ में जमाना डूब रहा हैं
भाग रहा हैं मुसाफ़िर शायद सूरज डूब रहा हैं

सियासत की दौड़ में अब वतन डूब रहा हैं
तू हिन्दू मैं मुसलमान कहकर इंसान डूब रहा हैं

चाहत की दौड़ में वो आशिक डूब रहा हैं
बात ना बनी तो अब मयखाने मे डूब रहा हैं

खयालो की दौड़ मे हर शख्स डूब रहा हैं
कुछ कर लो भाई नही तो वक्त डूब रहा हैं           

-- 'भारत "अजीब" --