{हालात कुछ अजीब लिखता हू मेरे ना सही पर मेरे यार के लिखता हू}
·····एक सफर······
शाम की सर्द हवाओ के कहर
के साथ,
आज मैं
सफर में था
खुद तोहफा बन,
तोहफा लीए . . .
कदम जमी पे थे
सामने अनजान से लोग,
सांसे थम सी गयी
उसके मिलने
का जो वक्त हुआ...
आज मेरा हाल
कुछ काले बादलो में
छिपे चांद की तरह था
मै बन्द कमरे मे
उसके
इन्तजार मे था
और
वो इस जश्न
के तोह्फे से
गाफिल,
सहेलियो की
अठखेलिया बढती गयी
कदम मेरी
ओर चलते गये,
आखिर कदम
रुक गये ,,
मेरे होने का
अहसास हुआ
ये ही तोहफा था
उसके जश्न पैदाईश का...
जैसे तितली फूलो को
देख मुस्कुराती हैं,
परीन्दे खुले
आसमान को देख,
और नदियां सागरो
से मिल
जो अनुभव महसूस करते है
कुछ वेसे ही सुकुन
का एहसास हो रहा था
उसकी झुकी नजरे
बार बार मुझसे
मिल इस्तकबाल
कर रही थी...
अब वक्त के साथ
दोनो की नजदिकिया
बढ रही थी
और माहौल मे गर्माहट
कुछ दोस्त
हंसी मजाक कर रहे थे
और हम
अपने अन्दाज मे
आखमिचोली
कुछ नजराने
उनको पेश हुए
कुछ तस्वीरो से
उनके तोहफे
की तैयारिया
फिर सर्द हवाओ
के साथ खुले मैदान में
झूले पे गूफ्तगु करना,
एक थी थाली में
निवाले लेना,
और हरी घास
की चादर पर
साथ साथ टहलना
नया सा था
यह जीस्त के शुरुआती
कदम थे
दो हयातो के ,
दोस्ती के साथ,
मोहब्बत के करीब,
रिश्तो मे तब्दील होने
वालो का सफर था
मेरे लिये
उसके लिये
मुस्कान के साथ,
कुछ नया सा था ,
अच्छा सा था...!!!!
भारत_शोभावत_कोटड़ी_'अजीब'
१८-१२-२०१४
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