बिजलियाँ गिरने लगी,लोग लाश होने लगे !
तेरे संवरने के बाद, सब इल्जाम आने लगे !!
पर्वत पत्थर पिघलने लगे, बादल बेवक्त रोने लगे !
तेरे घर से निकलने पर, सबके चहरे बदलने लगे !!
पंछी पंख भरने लगे ,फूल अब मुस्कुराने लगे !
तेरे मोहल्ले से गुजरने पर सब लोग चलने लगे !!
बाजार में हरकत होने लगी कई इशारे होने लगे !
तु रुकी दुकां पर तो लोग भी ग्राहक बनने लगे !!
ग़ालिब दर्द छाने लगा अब याद फ़राज आने लगे !
तेरा अजनबी से मिलने पर हम तो शायर होने लगे !!
♥..भारत..♥