Tuesday, November 13, 2012

""आशिक-चिराग""

रोशनी के बाजारो
मे कीमत
चिरागो की आई !   

महफ़ील सजी है
जाम लिए 
चिरागो की,
शक्ल कुछ
आशिको सी
नजर आई !     

चिरागो की
जलन चिरागो
मे आई,
आशिको की
दांसता
जमाने पर छाई !  

♥♥♥ भारत ♥♥♥

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Tuesday, October 23, 2012

{हालात कुछ अजीब लिखता हूँ मेरे ना सही पर मेरे यार के लिखता हूँ }

उन दिनों के
किस्से ,
कुछ लगते है
बागान के हिस्से
की तरह !
तेरा मिलना हुआ
मुक्कमल ,
सावन के
बोछारो की तरह !
तुम आती हो
मेरे ख्यालो में अब
फूलो के "खुश्बू" कि तरह !
बढती गयी
अपनी मोहब्बत ,
घास के
चादर की तरह !
मिलते गए
मुझे सपने ,
डाल डाल पर
कलियों की तरह !
उन सर्दी की
रातो में
छतो से गुफ्तगू
करते चेहरे
दिखते थे
हसते हुए
फूलो की तरह !
मेरा हर लम्हा
वो इरादा,
वो ख्याल,
वो चाहत ,
वे वादे
सब है तुझको
पाने की फ़िराक में
मगर ये दुनिया दिखती है
कुछ काँटों की तरह !
तुझसे बिछड़ना
मोहब्बत के
जख्मो को
भरना,
भरे घावो  का
तश्वीर में बदलना
फिर तो
उस तश्वीर व दिल
के हालात
कुछ हवाओं से
बन गए ,
जो सर पटकती
है अब भी
सूखे पतों पर
पतझड़ में फेले
मातम की तरह !

-----भारत------



एक शेर में पूरे हालात  :--

मेरी अनमोल कश्ती को मोहब्बत ऐसे साहिल से हुई _भारत!
जिसको मुश्फि तो चाहता मगर मुसाफिर नही चाहते !!!!!!!!


-----भारत------

 

Saturday, October 13, 2012

मुख़्तसर नफरत थी जिससे मुझको !
कलाम-ए-मोहब्बत भी उसी पे निकले !!

हर मुलाक़ात पर वो रज्म-ए-लब्ज !
गुफ्तगू कें बहाने भी उसी के निकले !!

दिखता था हुस्न, बुर्खे  की दीवार से !
मगर बाजारों में चेहरे भी उसी के निकले !!

ख़ाक हुआ नशा -ए- इश्क  उसके ही इरादों से !
वे सुरत के शौकीन होकर सीरत की राह पे निकले !!

-----भारत-----
उस शख्स को मोहब्बत की क्या खबर !
जो मोहब्बत का मतलब ना जाना कभी !!

उस शख्स की मोहब्बत का कितना सफर !
जो मोहब्बत  के रंग में ना मिला कभी !!

उस शख्स की मोहब्बत पर क्या भरोसा !
जो मोहब्बत को मोहब्बत ना समझा कभी !!

उस शख्स पर मोहब्बत का क्या असर !
जो मोहब्बत के लिबास में ना दिखा कभी !!

-----भारत-----
ना कभी उससे
बात हुई ,
ना कभी मुलाकात
चन्द दिनों की
उन कक्षा में,
उसकी बचपने  भरी
हरकतों से
नफरत कब हुई पता भी नहीं चला !

नफरत भरी आग
से उसको
मिलने की कोशिश ,
फिर मिलना
बतियाना,
बिखरना,
और  उसकी हरकतों
को समझना ,
कम्बख्त  मोहब्बत कब हुई पता भी नही चला !

मोहब्बत के
 नशे में ,
खामोश रहने की
गलती ,
फिर शक भरे
लब्ज का चलना ,
और लब्जो का
तीर में बदलना
कम्बख्त फिर से नफरत कब हुई पता भी नही चला !!!!!!!!


-----भारत-----

Monday, September 24, 2012

मुझे परवाह हैं
हर दिन,
मेरे अपनों की !
पर वे कहा
समझे कदर ,
मेरे सपनो की !
फिर भी
सफ़र चलता रहा
रास्ते बढ़ते रहे ,
ना हयात बदली,
न सोच !
बस  इशारे
मिलते रहे
रुख मुड़ता गया !
वक्त की तेजी ने
सफ़र को रोका
मेने उस सुबह
किनारे को देखा,
जिस पर खड़ी
कश्ती का
मुश्फि मै था
पर, वो रास्ते
वो सफ़र ,
वो इशारे ,
वो मंजिल
थी
मेरे अपनों की !
मेने भी
सफ़र में
दुरिया देखी  थी
सागरों की !
कम्बक्त  मंजिले
मिल ही जायेगी
मुझे ,
मेरे सपनों की !!!!! 


-----भारत-----

Sunday, September 2, 2012

-----खालीपन-----

उसके जिक्र पे "भारत" बात तो किया कर  !
सलाम के बदले कभी सलाम तो दिया कर  !!

जिंदगी के पलो को कुछ तु भी जिया कर  !
पूरी ना पी सके तो थोडी थोडी पिया कर  !!

इश्क  ना सही मगर दोस्ती तो किया कर  !
मुलाकात ना कर सके तो बात ही किया कर  !!

शुरुआत करे कोई तो साथ भी दिया कर  !
दूसरो को छोड के खुद को भी समझा कर  !!

बिछडें हुए यारो को कभी कभी तो मिला कर  !
दोस्ती के उन हिस्सों की तारीफे भी किया कर  !!

है अगर दुश्मनी तो दोस्ती से जाया कर  !
दिल मे छुपे दर्द को लफ्जो मे तो लाया कर  !!

चली गयी वो रात अब दिन मे तो जगा कर  !
चार दिन की जिंदगी को जिंदगी से जिया कर  !!

             -----भारत-----

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Thursday, August 30, 2012

········मेरे हनुमान···········

जब भी करता हुं तेरे दर पर सजदा  !
मैं खुद को भुल जाता हुं तुझे याद करते करते  !!

तुझे जब भी देखता हुं हर ख्वाब में !
मेरे अश्क बह जाते है तेरा नूर देखते देखते !!

जब भी ख्याल आता है तेरे हर हालात का !
मेरे अल्फाज खो जाते है तुझ पे नज्म लिखते लिखते !!  

तुने हर जगह में फैलाया है परचम अपना !
मेरा रुख मुड जाता है तेरा गान सुनते सुनते  !!   

तुने सबकी चाहत मुकम्मल की उनकी दुआं में !
मेरी तो हर चाहत रुक जाती है तेरे दर पे आते आते  !!   

जबसे देखा है तेरे दर को "भारत" इस पे नजर !
बस जिंदगी छोडना चाहता हु इस पे यूही हंसते हंसते !!    

                  -----भारत-----       

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Monday, August 20, 2012

---ईद मुबारक---

            --ईद मुबारक--

अल्लाह जाने कहा छुपा मेरे ईद का चांद ♥
उसे देखते ही खबर ईद की आई होगी ♥♥

तेरी पाक सीरत को या तारीफी हुस्न को ♥
जिसने भी देखा ईदी उसको मिल गई होगी ♥♥

अमीर है तु , तुझे इस गरीब की ईद से क्या ?♥
फिर भी दिल ने दुआ तेरे लीए ही की होगी ♥♥

जिसने तुझको देखा है, ईद उसको ही मुबारक ♥
शायद कीसी ओर को तस्वीर नशीब हुई होगी♥♥         

      ♥♥♥ भारत ♥♥♥        

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Wednesday, August 1, 2012

"कुछ था मगर नही सा"

{हालात कुछ अजीब लिखता हु ....
मेरे ना सही ...
पर, मेरे यार के लिखता हु ......}




कोलेज का सफ़र
अजीब था..
वो पास थी ,
मगर ..
दूरी का एहसास लिए !!

खुदा की मेहरबानी
व वक्त के साथ ...
मुझको मिला
दोस्ती का हाथ ...
एक आस लिए ..
प्यार का एहसास लिए !!

सफ़र शुरू हुआ ,
इंतजार के साथ
कुछ राह मेने देखी
कुछ उसने भी ...
जगह जो मिली
जहा मिली
जैसी मिली ...
मगर थी
जन्नत सा एहसास लिए !!

उसकी मुलाकाते
मुलाकात से हुई
वो बाते ...
बातो में जुल्फों
का गिरना ...
गिरी जुल्फों का
हाथो से मिलना
मेरे हाथ का
उस हाथ को रोकना
उस हालात से
उसका  मुस्कुराना
कुछ था जरुर
मगर ...
नही सा एहसास लिए !!

वक्त से धोखा मिला
उसका मिलना
कुछ कम हुआ ....
वो मुस्कुराना
अब नम हुआ ...
सुबह के इंतजार
को अब
शाम मिली ....
मेरी ही बातो को
शेखी की
राह मिली ..
दिल में कुछ था
मगर ...
दिखावे सा एहसास लिए !!

मै उलझा
फकत
सोच खातिर
बेमतलब की
आस में ...
अनबुझी सी
पहेली में ..
बेकार सी
उलझन में ...
"ये ऐसी है या वेसी"
वक्त जाया हुआ
कुछ यादो
के साथ ....
कुछ उनके
साथ गयी
तो कुछ मेरे भी ..
इसे मोहब्बत
कहू या
आशिकाना शौक
दिल धडकता था
उस के खातिर ..
मगर ...
दर्द का एहसास लिए !!

वक्त गुजर चुका ,
फिर भी ..
दिल आवारा
है तो ....
कभी बेगाना
कमबख्त आवाज भी
वही देता है ..
उसी आशा में ...
वो कुछ तो थी
मगर ....
नही सा एहसास लिए  !!!!!


-----भारत-----


बुजुर्गो की हरकते , अब भी  हकीकत सी  है !
तुम नये हो , लेकिन बाते पुरानी सी है !!

नियमो के बोझ में , पुतले कुछ नये से है !
सड़के बन चुकी पर , रास्ते पुराने से है !!

हालात कुछ नये मगर साये  वही पुराने है !
होश में कैसे रहे ,जब दिल ही बेह्होशी में है !!

मोहब्बत कहा है , जब हर वादे नए से है !
दिलो की महफ़िल में अब, दीवाने अजीब से है !!


-----भारत ----- 
चेहरे जितने देखे ..
सबके सब 
खुबसूरत थे ...
मुलाकात के बाद 
कुछ दिल से 
बदसूरत निकले .....

अजीब दौर था ,
जब नूर देखना 
नाज समझते थे ...
आज नकाब क्या 
हटे ....
गुरुर से भरे,
चेहरे निकले ....

चेहरे का ...
आशिकाना शौक 
इश्क के नाम ,
समझोता है ...
"ये नही तो वो ही सही "
ये प्यार है या ,
कोई खिलौना है !!!!!!

-----भारत ------
अजीब रुख मौसम ने बदला है !
कल का पंछी आज उड़ने लगा है 
गेरो की उस महफिल में ...
दिल के उस कोने तक ...
हमारा भी कही नाम छुपा है !!

वो खुदा को खुद का समझता था !
पर, काफ़िर के दिल में भी , 
खुदा सा नूर दिखा है.....
तू भी मुझ सा लगता है  
मै भी तो दीखता हु तुझ सा ..
फर्क सिर्फ रहा इतना 
मुझे हिन्दू का घर तो ,,
तुझे मुस्लिम का मिला है !!!

इंसानी मोहब्बत तुने भी सीखी ...
प्यार का पैगाम मिला मुझको भी 
कुछ दर्द तुने सहा ...
कुछ जख्म मिले मुझको भी 
फर्क सिर्फ इतना रहा ....
खुदगर्ज ने खुद खातिर ,
तुझे मुजाहिर तो मुझे ..
काफ़िर का नाम दिया है !!!!!



-----भारत शोभावत कोटडी----- 

Monday, July 9, 2012

*"निगाहें"*

           *"निगाहें"*

अजीब निगाहें थी "बचपने" से भरी !
जिधर भी उठी लोग दीवाने हो गए  !!

किस-किस को बचाती वो अनजान परी !
मोहल्ले से गुजरते ही लोग लाश हो गए  !!

निगाहों पर ही की थी , खुदा ने कारीगरी !
उनको देखकर तो हम भी शायर हो गए  !!

जुल्फो की भी किस्मत जो निगाहों पर बिखरी !
पलक के झपकते ही हम तो कंफ्युज हो गए  !!

                         --भारत-- 

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कुछ पंक्तिया IASE के नाम भी लिखना लाजमी है

कोलेज के वो दिन अब एलबम मे पिन हो गए !
रोशनी के आते ही सब चेहरे रंगीन हो गए !!

भाटी जी का अधिगम सुन सुन सब हेरान हो गए !
कटारा जी के आते ही राहु केतु शनि एक हो गए !!

आशा मेम की स्टाईल के सब दीवाने हो गए !
अग्रावत मेम को देख हम तो बेहोश ही हो गए !!

गुरनानी जी को सुनते ही 'लता' जी अनसुने हो गए !
टीलवानी जी की इंग्लिश से सब हिन्दी के हो गए !!

मुनीश्वर जी के बाते अब तक समझ में नही आई !
छीदन साहब की बाते अब तक निकल नही पाई  !!

वशिष्ठ जी की बातो से पुष्कर मेले याद हो गए !
हंसा हसाकर हसन जी सबके साहब बन गए !!

कब्बडी से निकल जाट साहब IASE के हो गए !
अरवीन्द जी सर थे या स्टुडेंट सब कंफ्युज हो गए !!
      
कमला जी की मुस्कान से सब मुस्कुराना सीख गए  !
इन्दु जी के डर से हम,  सबको डराना सीख गए  !!

IASE "अजीब" बांध था , हम नहरे बन के निकल गए !
हरा भरा देश को करने हम पूरे "भारत" मे बिखर गए !!


   
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kalam k kalaam

लिखा जो मोहब्बत में कलम से कलाम!
वही तो था , मेरा इश्क का सलाम  !!

ना मरना न मारना यह है प्यार का पैगाम  !
न चल सको इस पर तो हो जाओ बदनाम  !!

सफी बातो मे जो ना दे पाते फरमान  !
अश्क बहा ले जाता है उनके अरमान  !!

नेकी की राह मे 'भारत' लगा जाम पे जाम  !
तेरी कब्र तक पहुचेगा कल आला आवाम  !!

                 ---   भारत  ---

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guftgu

बात ना इस जंहा की थी ना उस जंहा की
बात थी तो सिर्फ दो हयात की
ना समझ पाए तुम बातो के उन रज्म को
तुम आंखो के मताहीम सिर्फ सिफर रह गये 
सफी बातो का वो परींदा रूस्तम बन गया
तुम इधर उधर के सिर्फ मुसाफिर रह गये  
   --भारत-- 
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Sunday, June 24, 2012

ख्वाबो से भरा ख्वाब

    "ख्वाबो से भरा ख्वाब"
        
पहली बार दिखे आज वो ख्वाब मे!ं
रुठे हुए मगर कुछ नये नजर आए !!

शिकायत थी उनकी हर एक लब्ज में !
आज इश्क मे बहते अश्क नजर आए  !!

आशियाने तक चले थे , आज वो ख्वाब में !
मेरे अपनो को अपनो की तरह मिलते नजर आए  !!

दिल चाह रहा था , बातो के उस सिलसिले को  !
हकीकत मे नही मगर ख्वाब में गुफ्तगु करते नजर आए!!

ढेर सारे ख्वाबो को संजोया था, आज ख्वाब में !
नींद के खुलते ही फिर से किताबों के बण्डल नजर आए!!    

            --भारत--  

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Saturday, June 16, 2012

** नया शहर **

** नया शहर **

जिंदगी की राह मे
न जाने कितने
शहर बद्ले
कभी इस दर को
तो कभी उस दर को
उम्र बीतती गई
रुह बढते गए
अनुभव क़ी होड मे
सपने बदले
तो कभी संभले
कही मित्र मिले
तो कही दोस्त बने 

आज पुराना शहर
अपनी दांस्ता से नये
शहर को नया बनाता
इन सडक़ो पर
अपने मिलने से
कतराते है
तो कुछ अपने
ना होकर भी
अपने बन जाते है
आज इस शहर मे
अपनो को ढुंढता हुं
एक सपना लिए
एक दुंआ लिए
एक अरमान लिए
तो कभी लोगो
का फरमान लिए

जिंदगी है ये
चलना  इसका
शौक है
अगर इस शहर मे
ना सही तो
और मे ही
कभी शौक है
तो कही शोंक है         

  --भारत--      

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Monday, June 11, 2012

ता उम्र जमाने को आंखे देखा करती थी !

अब उन्हे देख दिल के भी आंखे निकल आई  !!


इश्क मे दिल दिल को देखे ये ओर बात थी !

आज की आंखे दिल छोड कमर पर चली आई !!


मोहब्बत मे दूर रहकर भी दिल पास रहते थे !

आज जिस्म मिलाकर दूर रहने की प्रर्था चली आई!!


प्रेम मे त्याग करना भी वाह! क्या जिंदगी थी  !

आज उपयोग कर छोडने की महक चली आई !!                          

  --भारत--    


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Wednesday, May 30, 2012

--बें बात की बात--

--बें बात की बात--

वाह ! क्या वक्त था

जब प्यार हुआ

ना मैनें बात की

ना उसने शुरुआत

लोगो ने शेखी बरती

ऑर फलक पर

बात पहुच

बनी करामात

इस मुहं से

कभी उस मुह से

न जाने किस किस

के मुह से

निकल पडी एक ही बात

"क्या चक्कर है "

बातो का काफीला

गुजरा जिधर से

तो कुछ हमने सुना

कुछ सुन वे मुस्कुरा गए

देर ना हुई

निगाहों को भी

वे बातो से ना सही

तो इशारो से ही

बतीया गए

निगाहें, निगाहों से

ना हो सकी

आबाद

ओर हम हो गए

बेवजह बरबाद

वक्त गुजर चुका

वो अपने घर को चले

हम खुद के शहर को

कुछ याद लिए

कुछ मोहब्ब्त का

बोझ लिए

आज अर्से बाद भी

एक याद लिए

मुस्कुराते है

अनजाने मे भी हम

उनसे बात क्यु

नही कर पाते थे ?

बिन बातो से हुई

पहली मोहब्बत

आज भी

निगाहें घेरकर

दिल बिखेरती है

मन चहकता है

मैं महकता हु

वो हवा बन कर आती है

मैं चिराग बन

बुझ जाता हुं

नादान था मैं उस वक्त

अनजान थी वो परी

तभी कुछ लोगो ने

बना दी अपनी

मनचाही कहानी   !!!!!

              -- भारत शोभावत कोटडी --   

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Friday, May 25, 2012

चाहत :

         -- "श्री हनुमान जी (बाप जी) को अर्पणम् "--


मैं परिन्दा तेरे खुले कफश का !

खुद को छोड सिर्फ तुझे चाहुं !!


तु सागर है इस जमाने का !

मैं मौज बन लहरना चाहुं !!


तु दीवाना है मौजी कलंदर का !

मैं नजराना बन तुझे ही पाऊ  !!


बादशाह है तु इस महखाने का !

मैं पी-पी कर सबको पीलाऊ  !!


                        --भारत--   


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Wednesday, May 23, 2012

"अपनी कलम के कलाम "



दुकां की वे पतंग एक ही कफश के परीन्दे थी !

फलक में क्या गयी उसके अपनो ने ही काट डाला!!

               ----------


उस गूफ्तगू के पीछे  किताबें  रूठ गयी थी  !

अच्छा हुआ तुम चले गये किताबें अपनी हो गई  !!

          ----------------


निगाहें, निगाहों के खेल मे, हो जाती है बरबाद  !

रूक, बह, फिर संभले ,समझो हो गए आबाद  !!            

                   -------


भीग़ी मिट्टी :


बारिश का मिट्टी छूना ,

तेरी याद का आना .....

कुछ अजीब है  !!


महक को दिल से लगा ,

खामोश होकर भूल जाना .....

कुछ अजीब है  !!    

-------------------------------


खुद के लिए जीना है ...

मगर खुदगर्ज बनकर नही !


आशीयाने हजारो देखे ...

पर अपना हुआ ना कोई  !!

     -------------


मक्कारो की दहशत मे

न जाने कब होगी रहमत

क्यु न हमतुम करे दुआं पर मेहनत 

          ---------


प्रखरो का अजीब अर्ज है !

ज़िम्मा उठाना ही दर्द है ,

झुककर हटे वो नामर्द है

गर अनसुना करे समझो खुदगर्ज है   !! 

         ----------


हयात उस दर को ना लगी जो मेरा ठिकाना था !

कम्बख्त उस कदर चल पडी जेसा मेनें संवारा था !!

               ------------


  इश्क कर इस कदर बनी सोच  !

बेगाने होकर भी वे अपने लगते है  !!

                  ---- 


आज िफर फरेब के जंगल मे फस गया  "भारत" 

वो बेवकूफ बना गयी लोगो ने आवारा कह डाला

                 -------


इल्म के इस सागर मे 'भारत' तू ऐसी मोज बन  !

अपनो को तू रोशन कर ओरो को दे अपनापन  !!

                ------------

                             

हुस्न के उस आँगन पर हम , निगाहो को ना रोक पाए।

उसने पल्लू क्या सुधारा, हम खुद को ही ना देख पाए।।

                ------------


शेखी इस कदर कर  की अनजाने अपने हो जाए  !

दीवाने को मत देख पगली कही प्यार ना हो जाए  !!

               --------------


वतन को छोड गर तु इन्सानी मोहब्बत का परीन्दा होता !

तो उस खून खराबे को ना देख खुदा भी तेरा दिवाना होता !!

             -------------


         

                  --भारत--  


  


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Tuesday, May 22, 2012

" KHAMOSHI "


खामोश थे तुम ,
चुप थी मै ,
गुफ्तगू बहुत सारी हुई !!!!!


जव़ाब --


बातो का सिलसिला चल पडा , फिर भी  हम खामोश रहे !
कद्रदा हमें ऐसा मिला, जो खामोशी समझ कर भी चुप रहे !!

बात फलक तक गयी ,तो क्या पता अपने अपने ना रहे !
अपनों के लिए क्यों ना तुम चुप रहो ओर हम खामोश रहे !!

ख़ामोशी को ऐसा आईना बना दू , जिसमे सिर्फ तेरी सीरत रहे !
चुप रह कर भी तुम खुश रहो , मै आईना देख खामोश रहू !!

मेरी मोहब्बत ऐसा घरोंदा बन चुकी ,जिसे हम खुद बनाकर तोड़ रहे !
चाहत इबादत बन चुकी फिर भी , दुआं के कबुल होने से डर रहे !!

बात न बन सके तो कोई गम नही , आरजू है हम दोस्ती निभाते रहे
"भारत"  खामोश तुम चुप रहो , ओर यह गुफ्तगू यूही चलती रहे !!


-----भारत-----
 


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Sunday, May 20, 2012

जिंदगी और मंजिल :

जिंदगी और मंजिल :


इस बाजार से गुजरने का दिल नही करता !

उनकी उस बातो में अब मन नही लगता !!


सागरों में नदियों का कोई नाम नही रहता !

मफरूजा का सागर मुझे डुबा नही सकता !!


जिंदगी मौज है जिसका एक किनारा नही होता !

गिर कर भी जो संभले वो कभी राख नही होता !!


नाज़ में उडा परिन्दा सितारे छु नही सकता !

उठा जो पां जमी से फलक मे चल नही सकता !!


रोशनी के इस बाजार में अब चिराग नही जलता !

आंखे है मगर फिर भी 'भारत' देख नही सकता !!


                                          --भारत--   


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Wednesday, May 16, 2012

Halaat -e- hind

जमाना मुतजाद बन चुका है, करतार  !

लोग चाहकर भी नही रहते बरकरार  !!


चन्द शेखी से जो बन गए तक्कार  !

दुनिया जानकर भी ना करती उनको इन्कार  !!


कल तक थे जो पैदाईशी  मक्कार  !

आज दिल्ली के बन चुके हकदार  !!


जिनमें थी केवल हवस की मिक़दार   !

आज वे ही है देश के पहरेदार  !!


हे खुदा, ऐसा परींदा कर नूमदार  !

गरीबो का मसीहा जो 'भारत' मे रहे सदाबहार   !!


                               --भारत--



करतार =  ईश्वर

तक्कार =  वक्ता

मिक़दार = मात्रा

नूमदार =  प्रगट

                     


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मां

अर्से बीत गये घर से निकले वो बात साथ निभाती है !

मुझे दिन  मे एक बार मेरी मा की याद सताती है !!


मुझसे बात कर वह एक ही बात बतलाती है !

खाने का जिक्र कर वो हाथो की याद दिलाती है !!


मेरे झुकने से पहले ही मां मुझे गले से लगाती है !

लफ्जो की बहार के साथ वो दुआं को ले आती है !!


खुद जाग कर मां मेरी मुझे सुलाती है

प्यारे अफसाने बता मां मुझे घर को बुलाती है !!


मंजिल राह मे 'भारत' दीवानगी चमकती है !

मां से दूर रह कर भी मां हमेशा संग चलती है  !!             

     

                                 --भारत--  


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कश्मकश

लम्हे बीत गये एक ही कश्मकश में !

कोई ना कोई बात जरुर थी उस शख्स में !!


वो देखती रही हमे उस नजर से !

की मैं खुद बह गया अपने ही अश्क में !!


जहां भी गया मैं उसे ढूंढता रहा !

शायद खुदा का नूर था उस शख्स में !!


दुआं है वो उडती रहे सदा फलक में !

'भारत' खुश है अपने ही कफश में !!


                            --भारत--






सधन्यवाद----» आरीफ व बाहरठ

   


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Tuesday, May 15, 2012

ii ram ii



॥ हनुमान चालीसा ॥ भावार्थ सहित ..

कृपया अधिक से अधिक प्रेमी भक्त सेयर करे .. धन्यवाद् .. जय श्री राम


॥ दोहा ॥

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरसुधारि।

बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन कुमार।

बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार॥


भावार्थ : मैं सदगुरु के चरण कमलों कीधूल से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके, श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ जो (धर्म, अर्थ, काम औरमोक्ष रूपी) चारों फलों को देनेवालाहै। मैं स्वयं को अज्ञानी और निर्बल जानकर, पवन-पुत्र श्री हनुमान जी का स्मरण करता हूँ जो मुझे बल, सद्‍बुद्धि और ज्ञान प्रदान करेंगे और मेरे दुखों व दोषों का नाश करेंगे।


॥ चौपाई ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ (१)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपकी जय हो, आपज्ञान और गुण के सागर हैं, हे कपीश्वर!आपकी जय हो, आपका यश तीनों लोकों (स्वर्ग-लोक, पृथ्वी-लोक, पाताल-लोक) में फ़ैला हुआ है। (१)


राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्रपवनस ुत नामा॥ (२)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आप श्री राम जी के दूत हैं, आप अपार शक्ति के भण्डार है, आप माता अंजनि के पुत्र हैऔर आप पवन देव के पुत्र नाम से जाने जाते हैं। (२)


महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ (३)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आप महान वीर है, आप विशेष पराक्रमी हैं, आपका वज्रके समान अंग है, आप दुर्बुद्धि को दूरकरते हैं और सुबुद्धि प्रदान करते हैं। (३)


कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ (४)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपका स्वर्ण के समान रंग हैं, आपका सुन्दर वेश हैं, आपके कानों में कुंडल हैं और आप घुंघराले बालों से सुशोभित हैं। (४)


हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँजजनेऊ साजै॥ (५)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आप हाथ में गदा और ध्वजा धारण करते हैं, आपके कंधेपर धागों का जनेऊ शोभायमान है। (५)


शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ (६)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आप शिव जी के अवतार और केसरी के पुत्र हैं, आपके पराक्रम का और आपके यश का सारा संसार गुणगान करता है। (६)


विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ (७)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आप प्रकाण्ड विद्वान, आप गुणवान और अत्यंत कार्यकुशल हैं, आप राम जी के कार्य करने के लिए सदैव उत्सुक रहते हैं। (७)


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लषन सीता मन बसिया॥ (८)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपको प्रभु श्रीराम जी के चरित्र सुनने में आनन्द-रस मिलता हैं और राम, सीता और लक्ष्मण आपके ह्रदय में वसते हैं। (८)


सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा॥ (९)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपने अपना छोटा रूप धारण करके सीता माँ को दिखाया, और विकराल रूप धारण करके लंका को जलाया। (९)


भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र केकाज सँवारे॥ (१०)


भावार्थ : हे हनुमान जी! भयंकर रूप धारण करके राक्षसों का विनाश किया औरप्रभु श्रीराम के सभी कार्य सिद्ध किये। (१०)


लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ (११)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा की, प्रभु श्रीराम ने आपको हर्षित होकर हृदय से लगा लिया। (११)


रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ (१२)


भावार्थ : हे हनुमान जी! प्रभु श्रीराम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत के समान प्रिय भाई हो। (१२)


सहस बदन तुम्हरो जस गावै। अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥ (१३)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपका यश हजारों मुखों से गाने योग्य है, ऐसा कहकर सीता जी के पति प्रभु श्रीराम नेआपको गले से लगा लिया। (१३)


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारदसहित अहीसा॥ (१४)


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोविद कहि सके कहाँ ते॥ (१५)


भावार्थ : हे हनुमान जी! सनक कुमारों (सनक, सनन्दन, सनातन, सनत) सहित सभी ऋषि, ब्रह्मा जी सहित सभी देवता, मुनिनारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी, यमराज जी, कुबेर जी, सभी दिशाओं के रक्षक, कवि और विद्वान आदि भी आपके यशका पूर्ण रूप से वर्णन नहीं कर सकतेहैं। (१४,१५)


तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा॥ (१६)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपने सुग्रीव जी पर उपकार किया, प्रभु श्रीराम से मिलाकर उनको राज्य दिलाया। (१६)


तुम्हरो मंत्र विभीषन माना। लंकेश्वरभए सब जग जाना॥ (१७)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपके उपदेश कापालन करके विभीषण जी लंका के राजा बनेसमस्त संसार यह जानता है। (१७)


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ (१८)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपने हजारों योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को मीठा फल समझ कर निगल लिया। (१८)


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥ (१९)


भावार्थ : हे हनुमान जी! प्रभु श्रीर


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥ (१९)


भावार्थ : हे हनुमान जी! प्रभु श्रीराम की अंगूठी को मुख में रखकर आपसमुद्र को पार किया, यह आपके लिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है।


दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रहतुम्हरे तेते॥ (२०)


भावार्थ : हे हनुमान जी! इस संसार के सभी कठिन कार्य आपकी कृपा से सहज और सुलभ हो जाते हैं।


राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ (२१)


भावार्थ : हे हनुमान जी! प्रभु श्रीराम के द्वार की आप सुरक्षा करतेहैं, आपके आदेश के बिना वहाँ कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता है। (२१)


सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छककाहू को डरना॥ (२२)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपकी शरण ग्रहण करके सभी सुखी हो जाते हैं, जब आप रक्षक हैं तब किससे डरने की आवश्यकता है। (२२)


आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँकतें काँपै॥ (२३)


भावार्थ : हे हनुमान जी! अपनी महान शक्ति को आप ही सँभाल सकते हैं, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँपने लगते हैं।(२३)


भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ (२४)


भावार्थ : हे हनुमान जी! भूत-पिशाच आदिदुष्ट आत्माऎं उनके पास नहीं आतेहै,जोआपके नाम का गुणगान करते हैं। (२४)


नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ (२५)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपके महान नामका निरंतर जप करने वालों के सभी रोगोंका नाश हो जाता है और सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। (२५)


संकट तें हनुमान छुडावैं। मन क्रम बचनध्यान जो लावै॥ (२६)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आप सभी संकटोंसे उनकी रक्षा करते हैं जो मन से, शरीरसे और वाणी से सदा स्मरण करते है। (२६)


सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ (२७)


भावार्थ : हे हनुमान जी! सभी से श्रेष्ठ प्रभु श्रीराम तपस्वी राजा हैं, आपने उनके भी सभी कार्यों को सहजकर दिया। (२७)


और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ (२८)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आप की कृपा से मन की सभी इच्छायें पूर्ण होती हैं, औरतुरन्त अकल्पनीय फल प्राप्त हो जाते हैं। (२८)


चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ (२९)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपके यश का प्रकाश चारों युगों (सतयुग, त्रैतायुग, द्वापरयुग, और कलियुग) में रहता है, जिससे सम्पूर्ण संसार प्रकाशित होता है। (२९)


साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदनराम दुलारे॥ (३०)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आप सज्जनों कीरक्षा करते है, दुर्जनों का विनाश करते है इस कारण आप प्रभु श्रीराम के प्यारे हैं। (३०)


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ (३१)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आप आठों सिद्धियाँ और नौ प्रकार की सम्पत्ति को दे सकते हैं, ऐसा वरदान आपको माता सीता से प्राप्त है। (३१)


राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ (३२)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपके पास प्रभु श्रीराम के नाम की औषधी है, जिससे आप सदा प्रभु श्रीराम की शरण में रहते हैं। (३२)


तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ (३३)


भावार्थ : हे हनुमान जी! आपके स्मरण सेमनुष्य प्रभु श्रीराम को प्राप्त करके जन्म- जन्मान्तर के सभी कष्ट भूलजाते हैं। (३३)


अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि- भक्त कहाई॥ (३४)


भावार्थ : हे हनुमान जी! जो मनुष्य अंतसमय में आपका स्मरण करते है वह वैकुण्ठ में जन्म लेकर भगवान का भक्तकहलाता है। (३४)



और देवता चित न धरई। हनुमत से हि सर्वसुख करई॥ (३५)


भावार्थ : हे हनुमान जी! मनुष्य को अन्य देवताओं की पूजा करने की आवश्यकता नही रहती है, आपके स्मरण से ही सभी सुखों की प्राप्ति हो जाती है।(३५)


संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ (३६)


भावार्थ : हे हनुमान जी! जो आपकी वीरताका गुणगान करता है उनके सभी विपत्तियों का नाश हो जाता है और सभी कष्ट मिट जाते है। (३६)


जै जै जै हनुमान गोसाई। कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥ (३७)


भावार्थ : हे हनुमान जी! भक्तों की रक्षा करने वाले आपकी की जय हो, जय हो,जय हो, आप मुझ पर गुरु की तरह कृपा करें। (३७)


जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महासुख होई॥ (३८)


भावार्थ : जो कोई इस हनुमान चालीसा कासौ बार पाठ करेगा, वह जन्म-मृत्यु के बंधन से छूटकर परम-आनन्द को प्राप्त करेगा। (३८)


जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा। होय सिद्धिसाखी गौरीसा॥ (३९)


भावार्थ : जो मनुष्य इस हनुमान चालीसाको पढे़गा है उसको श्री शंकर भगवान कीकृपा से निश्चय ही सफ़लता प्राप्त होगी। (३९)


तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ ह्रदय महँ डेरा॥ (४०)


भावार्थ : श्री तुलसीदास जी कहते हैं,मैं सदा श्रीराम का सेवक हूँ, हे स्वामी! आप मेरे हृदय में निवास कीजिये। (४०)


॥ दोहा ॥

पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।

राम लषन सीता सहित ह्रदय बसहु सुर भूप॥


भावार्थ : हे पवनपुत्र, संकटमोचन, आनन्द स्वरूप श्री हनुमान जी आप श्रीराम जी, सीता जी और लक्ष्मण जीके साथ मेरे हृदय में निवास कीजिये। — 


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