Monday, July 9, 2012

*"निगाहें"*

           *"निगाहें"*

अजीब निगाहें थी "बचपने" से भरी !
जिधर भी उठी लोग दीवाने हो गए  !!

किस-किस को बचाती वो अनजान परी !
मोहल्ले से गुजरते ही लोग लाश हो गए  !!

निगाहों पर ही की थी , खुदा ने कारीगरी !
उनको देखकर तो हम भी शायर हो गए  !!

जुल्फो की भी किस्मत जो निगाहों पर बिखरी !
पलक के झपकते ही हम तो कंफ्युज हो गए  !!

                         --भारत-- 

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