Monday, July 9, 2012

कुछ पंक्तिया IASE के नाम भी लिखना लाजमी है

कोलेज के वो दिन अब एलबम मे पिन हो गए !
रोशनी के आते ही सब चेहरे रंगीन हो गए !!

भाटी जी का अधिगम सुन सुन सब हेरान हो गए !
कटारा जी के आते ही राहु केतु शनि एक हो गए !!

आशा मेम की स्टाईल के सब दीवाने हो गए !
अग्रावत मेम को देख हम तो बेहोश ही हो गए !!

गुरनानी जी को सुनते ही 'लता' जी अनसुने हो गए !
टीलवानी जी की इंग्लिश से सब हिन्दी के हो गए !!

मुनीश्वर जी के बाते अब तक समझ में नही आई !
छीदन साहब की बाते अब तक निकल नही पाई  !!

वशिष्ठ जी की बातो से पुष्कर मेले याद हो गए !
हंसा हसाकर हसन जी सबके साहब बन गए !!

कब्बडी से निकल जाट साहब IASE के हो गए !
अरवीन्द जी सर थे या स्टुडेंट सब कंफ्युज हो गए !!
      
कमला जी की मुस्कान से सब मुस्कुराना सीख गए  !
इन्दु जी के डर से हम,  सबको डराना सीख गए  !!

IASE "अजीब" बांध था , हम नहरे बन के निकल गए !
हरा भरा देश को करने हम पूरे "भारत" मे बिखर गए !!


   
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