*"निगाहें"*
अजीब निगाहें थी "बचपने" से भरी !
जिधर भी उठी लोग दीवाने हो गए !!
किस-किस को बचाती वो अनजान परी !
मोहल्ले से गुजरते ही लोग लाश हो गए !!
निगाहों पर ही की थी , खुदा ने कारीगरी !
उनको देखकर तो हम भी शायर हो गए !!
जुल्फो की भी किस्मत जो निगाहों पर बिखरी !
पलक के झपकते ही हम तो कंफ्युज हो गए !!
--भारत--
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hahahahahahah mast mast mazaak hai
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