लम्हे बीत गये एक ही कश्मकश में !
कोई ना कोई बात जरुर थी उस शख्स में !!
वो देखती रही हमे उस नजर से !
की मैं खुद बह गया अपने ही अश्क में !!
जहां भी गया मैं उसे ढूंढता रहा !
शायद खुदा का नूर था उस शख्स में !!
दुआं है वो उडती रहे सदा फलक में !
'भारत' खुश है अपने ही कफश में !!
--भारत--
सधन्यवाद----» आरीफ व बाहरठ
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