Friday, May 25, 2012

चाहत :

         -- "श्री हनुमान जी (बाप जी) को अर्पणम् "--


मैं परिन्दा तेरे खुले कफश का !

खुद को छोड सिर्फ तुझे चाहुं !!


तु सागर है इस जमाने का !

मैं मौज बन लहरना चाहुं !!


तु दीवाना है मौजी कलंदर का !

मैं नजराना बन तुझे ही पाऊ  !!


बादशाह है तु इस महखाने का !

मैं पी-पी कर सबको पीलाऊ  !!


                        --भारत--   


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