-- "श्री हनुमान जी (बाप जी) को अर्पणम् "--
मैं परिन्दा तेरे खुले कफश का !
खुद को छोड सिर्फ तुझे चाहुं !!
तु सागर है इस जमाने का !
मैं मौज बन लहरना चाहुं !!
तु दीवाना है मौजी कलंदर का !
मैं नजराना बन तुझे ही पाऊ !!
बादशाह है तु इस महखाने का !
मैं पी-पी कर सबको पीलाऊ !!
--भारत--
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