जिंदगी और मंजिल :
इस बाजार से गुजरने का दिल नही करता !
उनकी उस बातो में अब मन नही लगता !!
सागरों में नदियों का कोई नाम नही रहता !
मफरूजा का सागर मुझे डुबा नही सकता !!
जिंदगी मौज है जिसका एक किनारा नही होता !
गिर कर भी जो संभले वो कभी राख नही होता !!
नाज़ में उडा परिन्दा सितारे छु नही सकता !
उठा जो पां जमी से फलक मे चल नही सकता !!
रोशनी के इस बाजार में अब चिराग नही जलता !
आंखे है मगर फिर भी 'भारत' देख नही सकता !!
--भारत--
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