Sunday, May 20, 2012

जिंदगी और मंजिल :

जिंदगी और मंजिल :


इस बाजार से गुजरने का दिल नही करता !

उनकी उस बातो में अब मन नही लगता !!


सागरों में नदियों का कोई नाम नही रहता !

मफरूजा का सागर मुझे डुबा नही सकता !!


जिंदगी मौज है जिसका एक किनारा नही होता !

गिर कर भी जो संभले वो कभी राख नही होता !!


नाज़ में उडा परिन्दा सितारे छु नही सकता !

उठा जो पां जमी से फलक मे चल नही सकता !!


रोशनी के इस बाजार में अब चिराग नही जलता !

आंखे है मगर फिर भी 'भारत' देख नही सकता !!


                                          --भारत--   


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