अर्से बीत गये घर से निकले वो बात साथ निभाती है !
मुझे दिन मे एक बार मेरी मा की याद सताती है !!
मुझसे बात कर वह एक ही बात बतलाती है !
खाने का जिक्र कर वो हाथो की याद दिलाती है !!
मेरे झुकने से पहले ही मां मुझे गले से लगाती है !
लफ्जो की बहार के साथ वो दुआं को ले आती है !!
खुद जाग कर मां मेरी मुझे सुलाती है
प्यारे अफसाने बता मां मुझे घर को बुलाती है !!
मंजिल राह मे 'भारत' दीवानगी चमकती है !
मां से दूर रह कर भी मां हमेशा संग चलती है !!
--भारत--
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