Thursday, August 30, 2012

········मेरे हनुमान···········

जब भी करता हुं तेरे दर पर सजदा  !
मैं खुद को भुल जाता हुं तुझे याद करते करते  !!

तुझे जब भी देखता हुं हर ख्वाब में !
मेरे अश्क बह जाते है तेरा नूर देखते देखते !!

जब भी ख्याल आता है तेरे हर हालात का !
मेरे अल्फाज खो जाते है तुझ पे नज्म लिखते लिखते !!  

तुने हर जगह में फैलाया है परचम अपना !
मेरा रुख मुड जाता है तेरा गान सुनते सुनते  !!   

तुने सबकी चाहत मुकम्मल की उनकी दुआं में !
मेरी तो हर चाहत रुक जाती है तेरे दर पे आते आते  !!   

जबसे देखा है तेरे दर को "भारत" इस पे नजर !
बस जिंदगी छोडना चाहता हु इस पे यूही हंसते हंसते !!    

                  -----भारत-----       

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