{हालात कुछ अजीब लिखता हु ....
मेरे ना सही ...
पर, मेरे यार के लिखता हु ......}
कोलेज का सफ़र
अजीब था..
वो पास थी ,
मगर ..
दूरी का एहसास लिए !!
खुदा की मेहरबानी
व वक्त के साथ ...
मुझको मिला
दोस्ती का हाथ ...
एक आस लिए ..
प्यार का एहसास लिए !!
सफ़र शुरू हुआ ,
इंतजार के साथ
कुछ राह मेने देखी
कुछ उसने भी ...
जगह जो मिली
जहा मिली
जैसी मिली ...
मगर थी
जन्नत सा एहसास लिए !!
उसकी मुलाकाते
मुलाकात से हुई
वो बाते ...
बातो में जुल्फों
का गिरना ...
गिरी जुल्फों का
हाथो से मिलना
मेरे हाथ का
उस हाथ को रोकना
उस हालात से
उसका मुस्कुराना
कुछ था जरुर
मगर ...
नही सा एहसास लिए !!
वक्त से धोखा मिला
उसका मिलना
कुछ कम हुआ ....
वो मुस्कुराना
अब नम हुआ ...
सुबह के इंतजार
को अब
शाम मिली ....
मेरी ही बातो को
शेखी की
राह मिली ..
दिल में कुछ था
मगर ...
दिखावे सा एहसास लिए !!
मै उलझा
फकत
सोच खातिर
बेमतलब की
आस में ...
अनबुझी सी
पहेली में ..
बेकार सी
उलझन में ...
"ये ऐसी है या वेसी"
वक्त जाया हुआ
कुछ यादो
के साथ ....
कुछ उनके
साथ गयी
तो कुछ मेरे भी ..
इसे मोहब्बत
कहू या
आशिकाना शौक
दिल धडकता था
उस के खातिर ..
मगर ...
दर्द का एहसास लिए !!
वक्त गुजर चुका ,
फिर भी ..
दिल आवारा
है तो ....
कभी बेगाना
कमबख्त आवाज भी
वही देता है ..
उसी आशा में ...
वो कुछ तो थी
मगर ....
नही सा एहसास लिए !!!!!
-----भारत-----
मेरे ना सही ...
पर, मेरे यार के लिखता हु ......}
कोलेज का सफ़र
अजीब था..
वो पास थी ,
मगर ..
दूरी का एहसास लिए !!
खुदा की मेहरबानी
व वक्त के साथ ...
मुझको मिला
दोस्ती का हाथ ...
एक आस लिए ..
प्यार का एहसास लिए !!
सफ़र शुरू हुआ ,
इंतजार के साथ
कुछ राह मेने देखी
कुछ उसने भी ...
जगह जो मिली
जहा मिली
जैसी मिली ...
मगर थी
जन्नत सा एहसास लिए !!
उसकी मुलाकाते
मुलाकात से हुई
वो बाते ...
बातो में जुल्फों
का गिरना ...
गिरी जुल्फों का
हाथो से मिलना
मेरे हाथ का
उस हाथ को रोकना
उस हालात से
उसका मुस्कुराना
कुछ था जरुर
मगर ...
नही सा एहसास लिए !!
वक्त से धोखा मिला
उसका मिलना
कुछ कम हुआ ....
वो मुस्कुराना
अब नम हुआ ...
सुबह के इंतजार
को अब
शाम मिली ....
मेरी ही बातो को
शेखी की
राह मिली ..
दिल में कुछ था
मगर ...
दिखावे सा एहसास लिए !!
मै उलझा
फकत
सोच खातिर
बेमतलब की
आस में ...
अनबुझी सी
पहेली में ..
बेकार सी
उलझन में ...
"ये ऐसी है या वेसी"
वक्त जाया हुआ
कुछ यादो
के साथ ....
कुछ उनके
साथ गयी
तो कुछ मेरे भी ..
इसे मोहब्बत
कहू या
आशिकाना शौक
दिल धडकता था
उस के खातिर ..
मगर ...
दर्द का एहसास लिए !!
वक्त गुजर चुका ,
फिर भी ..
दिल आवारा
है तो ....
कभी बेगाना
कमबख्त आवाज भी
वही देता है ..
उसी आशा में ...
वो कुछ तो थी
मगर ....
नही सा एहसास लिए !!!!!
-----भारत-----
No comments:
Post a Comment