Sunday, October 5, 2014

ठिकाना बदलता हू हर दिल से, दिल मिलने से पहले...

ठिकाना बदलता हू हर दिल से, दिल मिलने से पहले...
सुना हैं मुझसे बिछड़ने के बाद, वो रोया बहुत हैं...!

काफी सोचा था मेने , उसको मिलने से पहले...
मगर उसे देखते ही लब्ज आंखो से निकले बहुत हैं...!

संभाल के रखा था उसने, बकरा ईद से पहले...
मगर हलाल करते हुए वो शख्स रोया बहुत हैं...!      

बुढे चिरागों से दुआं , उसने बटोरी थी पहले...
सुना है उसके आंगन मे आज रोशनी बहुत हैं...!

भारत_शोभावत_कोटड़ी_'अजीब'

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