खूबियाँ महफूज रखता है आशिक तेरी,
कुछ गुनाह भी तो कर दुश्मनो के लिए...
महकती है हर जगह में सुगन्ध तेरी,
कभी नजर भी तो आ हकीकत के लिए...
पुकारती है मस्जिद से वो आवाम तेरी,
कभी मन्दिर भी तो आ अपनो के लिए...
तेरे खातिर रखती है रोजां अम्मा तेरी,
कभी मिल भी तो आ उसे खुदा के लिए...
मौसम की तरह बदलती है "अजीब" अदाएं तेरी,
कभी मुड़कर भी तो देख, दोस्तो के लिए...
-- 'भारत "अजीब" --
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